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अतिथि पर कवितांश

अतिथि का अभिप्राय है—आगंतुक,

मेहमान, अभ्यागत। ‘अतिथि देवो भवः’ की भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में वह अत्यंत सत्कार-योग्य कहा गया है। काव्य में प्रवेश और घर करता अतिथि अपने अर्थ और उपस्थिति का विस्तार करता चलता है।

प्रियतम का दूत

मेरे स्वप्न में आया

मैं उसका अतिथि-सत्कार

किस प्रकार करूँ?

तिरुवल्लुवर

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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