Font by Mehr Nastaliq Web

फूल पर ग़ज़लें

अमेरिकी कवि एमर्सन ने

फूलों को धरती की हँसी कहा है। प्रस्तुत चयन में फूलों और उनके खिलने-गिरने के रूपकों में व्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

नैनन से आँसू

ए. कुमार ‘आँसू’

उमड़ल नदी के धार

जौहर शफियाबादी

घर अन्हरिया के सुरूज

मिथिलेश ‘गहमरी’

ना हँसी बाटे

मिथिलेश ‘गहमरी’

ई का गजब भइल

जौहर शफियाबादी

काम सब जहुआ

ए. कुमार ‘आँसू’

कहे के रहत बानी

मिथिलेश ‘गहमरी’

आम महफिल में बनिके खास रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

फूल पर 'करफू

मिथिलेश ‘गहमरी’

कभी लौ का इधर जाना

डी. एम. मिश्र

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here

रजिस्टर कीजिए