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बाढ़ पर कविताएँ

देश की विभिन्न नदियों

में साल-दर-साल आती बाढ़ जीवन, संपत्ति और आजीविका के संकट उत्पन्न करती हैं जिसे कविताओं में चिंता और सहानुभूति से देखा गया है। इस चयन में बाढ़ विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

बाढ़

शुन्तारो तानीकावा

बाढ़

अय्यप्प पणिक्कर

बाढ़

दिनेश कुमार शुक्ल

सारी चीज़ें नहीं

कृष्णमोहन झा

आएगी बाढ़

समृद्धि मनचंदा

बाढ़

गोविंद द्विवेदी

बाढ़ के एक दृश्य में

अमिताभ चौधरी

पानी में घिरे हुए लोग

केदारनाथ सिंह

हूक

अरुणाभ सौरभ

बाढ़िक हकरोस

आरसी प्रसाद सिंह

सजल कुशल

आरसी प्रसाद सिंह

म्वाट और म्वाट होइ

श्यामसुंदर मिश्र 'मधुप'

नदी से नाता

ब्रजभूषण मिश्र

जल प्रलय

रामाज्ञा शशिधर

सुरता

अमरनाथ झा ‘अमर’

बाढ़

एन. गोपि

बाढ़ में भाषण

राकेश कबीर

सावन

राकेश कबीर

बाढ़ के बाद

कृष्णमोहन झा

नदी आदमख़ोर हो गई है

राज्यवर्द्धन

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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