अकाल पर उद्धरण
अकाल वह स्थिति है जब
प्राकृतिक आपदा, फ़सल-विफलता, युद्ध अथवा अराजकता के परिदृश्य में अनाज, पशुओं के चारे एवं अन्य आवश्यक खाद्य-सामग्रियों का अभाव उत्पन्न होता है। अस्तित्व पर तत्कालीन संकट और भविष्य पर इसके कुल जमा प्रभाव के रूप में यह मानवीय संवेदना का विषय है जो काव्य में अभिव्यक्ति पाता रहा है।
जब संकट आता है, जब बम गिरते हैं या बाढ़ आती है—तभी हम मनुष्य अपने श्रेष्ठतम रूप में प्रकट होते हैं।
विनाश-लीलाएँ लोगों के श्रेष्ठतम पक्ष को सामने ले आती हैं।
प्रभु का सर्वत्र सुकाल है, दुर्भाग्यशाली को अकाल है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere