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स्वप्न पर गीत

सुप्तावस्था के विभिन्न

चरणों में अनैच्छिक रूप से प्रकट होने वाले दृश्य, भाव और उत्तेजना को सामूहिक रूप से स्वप्न कहा जाता है। स्वप्न के प्रति मानव में एक आदिम जिज्ञासा रही है और विभिन्न संस्कृतियों ने अपनी अवधारणाएँ विकसित की हैं। प्रस्तुत चयन में स्वप्न को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

सब आँखों के आँसू...

महादेवी वर्मा

पहले हमें नदी का सपना

विनोद श्रीवास्तव

गाँव के सँवरिया

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

हरसे किसनवां

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

साँझ झुकती आ रही है

ज्ञानवती सक्सेना

चलऽ चलीं खेतवा में धनियां

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

सपनाक अनुबंध

मार्कण्डेय प्रवासी

लहरेला खेतवा में धनवां

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

खेतवा में खटऽ खरिहनवां में खटऽ

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

हम नदी के दो किनारे

विशाल समर्पित

सत्य स्वप्न

शंभुनाथ सिंह

कवन ओर-छोर

ब्रजभूषण मिश्र

सपना सजावे आ गइल बा

रमाकान्त मुकुल

महुआ के फूल झरे

भोलानाथ गहमरी

प्रेमलक्ष्य

धीरेन्द्र प्रेमर्षि

लहरे फसलिया...

अशोक द्विवेदी

सपना

गोरख पांडेय

लिया-दिया तुमसे मेरा था

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

उड़बै गे आसमानमे

दीपिका चन्द्रा

जागल आगि

शान्ति सुमन

स्वप्न और सत्य

शंभुनाथ सिंह

मौन झूठा सच हुआ है

प्रदीप बहराइची

स्वाद लगा

राघवेंद्र शुक्ल

ले चलो उस दिशा

अमन अक्षर

नए गीत

जय चक्रवर्ती

मुझसे मिला कोई

रमानाथ अवस्थी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere