हम पहाड़ पर नहीं, बल्कि ख़ुद पर विजय पाते हैं।
आप कभी भी इतने बूढ़े नहीं होते हैं कि कोई और लक्ष्य निर्धारित न कर सकें या कोई नया सपना न देख पाएँ।
कछुआ तभी आगे बढ़ता है, जब अपनी गर्दन बाहर निकालता है।
सफल व्यक्ति वह है जो अपने ऊपर फेंकी गई ईंटों को इकट्ठा करके मज़बूत नींव बना लेता है।
जितना हम अपने कर्मों को निर्धारित करते हैं, उतना ही हमारे कर्म हमें निर्धारित करते हैं।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere