जो एक भाव लेकर उसी में मत्त रह सकते हैं, उन्ही के हृदय में सत्य-त्तत्त्व का उन्मेष होता हैं।
मन को एकाग्र करना आरंभ करने पर देखोगे कि एक सामान्य पिन गिरने से ही ऐसा मालूम होगा कि मानो तुम्हारे मस्तिष्क में से वज्र पार हो गया।
एकाग्रता का अर्थ ही है, शक्तिसंचय की क्षमता को बढ़ाकर समय को घटा लेना। राजयोग इसी एकाग्रता की शक्ति को प्राप्त करने का विज्ञान है।
जो कुछ भी आप देखते या महसूस करते हैं; जैसे कोई किताब, उसे उठाएँ। पहले उस पर मन को एकाग्र करें, फिर उस ज्ञान पर जो किताब के रूप में मौजूद है, फिर उस अहंकार पर जो किताब को देख रहा है और इसी तरह आगे बढ़ते रहें। इस अभ्यास से सभी इंद्रियों पर विजय प्राप्त हो जाएगी।
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एक भाव को पकड़ो, उसी को लेकर रहो। उसका अंत देखे बिना उसे मत छोड़ो।
मन की शक्तियों को एकाग्र करना ही, ईश्वर के दर्शन प्राप्त करने का एकमात्र साधन है।
मन जितना अधिक एकाग्र होता है, उतनी ही अधिक शक्ति प्राप्त होती है।
एकाग्र अवस्था तभी होती है, जब मन विरुद्ध होने के लिए प्रयत्न करता है और निरुद्ध अवस्था ही हमें समाधि में ले जाती है।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere