वैभवरहित व्यक्ति
एक न एक दिन
बन सकता है वैभवशाली
लेकिन! जिनके हृदय में दया नहीं
उनका उद्धार हो सकता कभी नहीं
अपने नन्हे-मुन्ने के
हाथ से बिलगा भात
माता-पिता को
अमृत-सा स्वादिष्ट लगता है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere