चेखव और वे 'कल्चर्ड' महिलाएँ
मेरे लिए बुरा दिन वह होता है; जब किसी कवियाए मनुष्य या घोर उत्साही साहित्यानुरागी से भेंट हो जाए, या किसी ऐसे ‘विचारक’ से जो विभिन्न वाद-विवादों में धैर्य से गहरे न पैठा हो, पर फिर भी इस क्षेत्र में अंधाधुंध अपनी गदा घुमाए रहता हो। घोर कलाहीन और ‘विचार-विरोधी’
ललित कार्तिकेय
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere