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राम-राम सभु को कहै

raama-raam sabhu ko kahai

गुरु अमरदास

अन्य

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गुरु अमरदास

राम-राम सभु को कहै

गुरु अमरदास

और अधिकगुरु अमरदास

    राम-राम सभु को कहै, कहिऐ रामु होइ।

    गुर परसादी रामु मलि बसै, ता फलु पावै कोइ॥

    अंतरि गोविंद जिसु लागै प्रीति।

    हरि तिसु कदै बीसरै, हरि-हरि करहिं सदा मनि चीति ॥॥रहाउ॥

    हिरदै जिन्हकै कपटु बसै, बाहरहु संत कहाहि।

    त्रिसना मूलि चूकई, अंति गए पछुताहि॥

    अनेक तीरथ जे जतन करै तो अंतर की हउमै कदे जाइ।

    जिसु नर की दुबिधा जाइ, धरमराइ तिसु देई सजाइ॥

    करमु होवै सोई जनु पाए गुरमुखि बूझै कोई।

    नानक चरहु हउमै मारे तां हरि भटै सोई॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : संत काव्य-धारा (पृष्ठ 161)
    • संपादक : परशुराम चतुर्वेदी
    • रचनाकार : अमरदास
    • प्रकाशन : किताब महल, इलाहाबाद
    • संस्करण : 1981

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