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उद्धरण

उद्धरण श्रेष्ठता का संक्षिप्तिकरण हैं। अपने मूल-प्रभाव में वे किसी रचना के सार-तत्त्व सरीखे हैं। आसान भाषा में कहें तो किसी किताब, रचना, वक्तव्य, लेख, शोध आदि के वे वाक्यांश जो तथ्य या स्मरणीय कथ्य के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं, उद्धरण होते हैं। भाषा के इतिहास में उद्धरण प्रेरणा और साहस प्रदान करने का काम करते आए हैं। वे किसी रचना की देह में चमकती आँखों की तरह हैं, जिन्हें सूक्त-वाक्य या सूक्ति भी कहा जाता है। संप्रेषण और अभिव्यक्ति के नए माध्यमों में इधर बीच उद्धरणों की भरमार है, तथा उनकी प्रासंगिकता और उनका महत्त्व स्थापना और बहस के केंद्र में है।

1590 -1670

संस्कृत के प्रसिद्ध आचार्य। 'रसगंगाधर' पुस्तक के लिए ख्यात।

1894 -1971

द्विवेदीयुगीन निबंधकार। ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादन और आलोचना में भी योगदान।

1856 -1894

भारतेंदु युग के महत्त्वपूर्ण कवि, गद्यकार और संपादक। 'ब्राह्मण' पत्रिका से चर्चित।

1880 -1936

हिंदी कहानी के पितामह और उपन्यास-सम्राट के रूप में समादृत। हिंदी साहित्य में आदर्शोन्मुख-यथार्थवाद के प्रणेता।

1940

सातवें दशक में उभरे कवि। अनुवाद, कला-आलोचना और संपादन में भी सक्रिय।

1879 -1973

सामाज सुधारक, चिंतक और लेखक।

अपभ्रंश भाषा के महाकवि। 'महापुराण', 'जसहरचरिअ' और 'णायकुमारचरिअ' के लिए उल्लेखनीय।

570 BC

संसारप्रसिद्ध गणितज्ञ और दार्शनिक।

1904 -1973

20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली कवियों में से एक। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित।

1792 -1822

अँग्रेज़ी रोमांटिक काव्यधारा के सुप्रसिद्ध कवि। स्वतंत्र विचारधारा, विद्रोही स्वभाव, मानवीय करुणा और कल्पनाशील काव्यशक्ति के लिए चर्चित।

1930 -2022

प्रसिद्ध इतालवी लेखक, साहित्यिक आलोचक और जीवनी लेखक।

1921 -1997

संसारप्रसिद्ध शिक्षाविद्-चिंतक।

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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