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Sant Tukaram

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تمام تمام

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लोभी के चित धन बैठे, कामिनि के चित काम।

माता के चित पूत बैठे, तुका के मन राम॥

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तुका बड़ो मानूं, जिस पास बहुत दाम।

बलिहारी उस मुख की, जिस ते निकसे राम॥

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चित्त मिले तो सब मिले, नहिं तो फुकट संग।

पानी पत्थर एक ही ठोर, कोर भीजे अंग॥

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राम-राम कह रे मन, और सुं नहिं काज।

बहुत उतारे पार आगे, राखि तुका की लाज॥

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तुका दास तिनका रे, राम भजन नित आस।

क्या बिचारे पंडित करो रे, हात पसारे आस॥

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अभ्यास के बिना साध्य की प्राप्ति हो, यह संभव नहीं है।

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अंधे की लाठी पकड़ने वाला अंधा हो तो दोनों ही गड्ढे में गिरते हैं।

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मनुष्य इस संसार में दो दिन का अतिथि है।

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धर्म का अर्थ है प्राणियों पर दया।

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प्राणियों का पालन और दुष्टों का संहार इसी का नाम है 'दया'।

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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