Font by Mehr Nastaliq Web
Harold Pinter's Photo'

Harold Pinter

1930 - 2008 | لندن, دوسرا

کی

1
Favorite

باعتبار

नाटक में सत्य एक शाश्वत मरीचिका है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

वास्तविक सत्य यह है कि नाटक की कला में कभी कोई एक सत्य जैसी चीज़ नहीं रही है।

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

एक नागरिक के तौर पर मैं यह ज़रूर पूछूँगा कि सत्य क्या है? ग़लत क्या है?

  • विषय : 1
    اور 2 مزید

यथार्थ क्या है और अयथार्थ क्या है–इसका कोई स्पष्ट भेद नहीं रहा है और ही सच्च झूठ में कोई अंतर रहा है।

  • विषय :
    اور 2 مزید

एक लेखक की ज़िंदगी अत्यंत प्रहार्य होती है, लगभग आवरणविहीन गतिविधि। हमें उसको लेकर रोने की ज़रूरत नहीं है। लेखक अपना चुनाव करता है और उस पर टिका रहता है। लेकिन यह कहना सही होगा कि आप सभी तरह की हवाओं के लिए खुले हैं और इनमें से कुछ निश्चय ही बर्फ़ानी होती हैं। आप अपने बूते बाहर निकलते हैं, अपने हाथ-पैरों (लिंब) पर। आपको कोई आड़, कोई सुरक्षा नहीं मिलती-बशर्ते कि आप झूठ बोलें—इस मामले में भी आपने अपनी सुरक्षा स्वयं ही बनाई है और तर्क किया जा सकता है कि इस तरह आप राजनीतिक बन जाते हैं।

मैं सदा हर नाटक की शुरुआत पात्रों को कह कर करता हूँ।

  • विषय :

कोई ज़रूरी नहीं कि कोई चीज़ पूरी तरह सच या झूठ हो; यह सच और झूठ दोनों हो सकती है।

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

अधिसंख्य नाटक एक पंक्ति, एक शब्द या एक छवि (इमेज) से जन्म लेते हैं। इस शब्द के तत्काल बाद अकसर एक छवि उभरती है।

  • विषय :

अमेरिका बिना किसी शंका के सबसे बड़ा तमाशा है। यह बर्बर, निर्मोही, घृणा से भरा और निर्मम हो सकता है पर यह अत्यंत चतुर भी है। एक सेल्समैन के तौर पर इसका ज़वाब नहीं है और इसकी सबसे बड़ी बिक्री की चीज़ इसका आत्म प्रेम है। यह विजेता है।

  • विषय : 1

लोग कई बार यह भूल जाते हैं कि सतानेवाला आसानी से ऊब जाता है।

  • विषय :

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए