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Gurajada Apparao's Photo'

गुरजाड अप्पाराव

1862 - 1915 | आँध्र प्रदेश

तेलुगु साहित्य के नवयुग के वैतालिक के रूप में समादृत नाटककार और कवि।

तेलुगु साहित्य के नवयुग के वैतालिक के रूप में समादृत नाटककार और कवि।

गुरजाड अप्पाराव के उद्धरण

जो मानव भिन्नत्व में एकत्व को देखता है वही प्राज्ञ माना जा सकता है।

देश का अर्थ मिट्टी नहीं है। देश का अर्थ जन-समुदाय है।

  • संबंधित विषय : देश

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