जॉर्ज ऑरवेल के उद्धरण
अगर किसी शब्द को हटाना संभव है, तो उसे बेहिचक हटा दें।
जहाँ छोटा शब्द काम आ सकता है, वहाँ लंबा शब्द कभी न प्रयोग करें।
जहाँ सक्रिय ढंग से वाक्य का प्रयोग हो सकता है, वहाँ निष्क्रिय ढंग वाक्य का प्रयोग न करें।
जिस रूपक, उपमा या अन्य किसी अलंकार का प्रयोग आप अक्सर छपे हुए में देखते हैं, उनका प्रयोग कभी न करें।
अगर किसी विदेशी जुमले, वैज्ञानिक शब्द या उलझाऊ शब्द के स्थान पर रोज़मर्रा का कोई शब्द प्रयोग किया जा सकता हो, तो वही प्रयोग करें।
इन नियमों को बिना देरी तोड़ देना बेहतर है, बजाय इसके कि आप कुछ बिल्कुल बेहूदा या अमानवीय कहें।
अगर लोग अच्छा लिख नहीं सकते, तो वे अच्छा सोच नहीं सकते और यदि वे अच्छा सोच नहीं सकते तो फिर उनके लिए सोचने का काम कोई और करता है।
सबसे अच्छी क़िताबें वे हैं जो आप को वह बताती हैं जो आप पहले से जानते हैं।
अगर तुम छोटे नियमों को मान सको तो तुम बड़े नियम तोड़ सकते हो।
यदि विचार भाषा को दूषित करते हैं तो भाषा भी विचारों को दूषित कर सकती है।
पचास साल की उम्र हर मनुष्य के पास वह चेहरा होता है जिसमें उसकी आत्मा झलकती है।
शायद हमें प्यार किये जाने से ज़्यादा ज़रूरत समझे जाने की थी।
निष्ठाहीनता, स्पष्ठ भाषा की दुश्मन है। जब किसी के वास्तविक और घोषित उद्देश्यों के बीच एक अंतर होता है तब वह स्वतः ज़्यादा शब्दों और मुहावरों की तरफ मुड़ जाता है। उस मछली की तरह जो स्याही उगलती है।
यह भी सच है कि कोई कुछ पठनीय तब तक नहीं लिख सकता जब तक वह लगातार ख़ुद के व्यक्तित्व से ख़ुद को मुक्त न करता रहे। अच्छा गद्य एक खिड़की की तरह होता है।
यदि तुम कोई रहस्य रखना चाहते हो तो तुम्हें उसे स्वयं से भी ओझल रखना चाहिए।
भाषा, कवियों और श्रमिकों की संयुक्त कृति होनी चाहिए।
तुम्हें बहुत ज़्यादा प्रयासरत रहना चाहिए। संयत होना आसान नहीं है।
पृथ्वी की सतह से प्यार करने के लिए, ठोस वस्तुओं और अनुपयोगी जानकारियों के अवशेषों का सुख लेने के लिए, जब तक मैं स्वस्थ और जीवित हूँ गद्य शैली के लिए दृढ़ता से महसूस करता रहूँगा।
वास्तविकता, मनुष्य के विवेक में रहती है और कहीं नहीं।
एकमात्र अच्छा मनुष्य वह है जो मृत है।
जो अतीत पर विजय प्राप्त कर लेता है, वह भविष्य पर विजय प्राप्त कर लेता है। जो वर्तमान पर विजय प्राप्त कर लेता है वह अतीत पर विजय प्राप्त कर लेता है।
मनुष्य तभी ख़ुश रह सकता है जब वह यह मान कर न बैठा हो कि जीवन का उद्देश्य ख़ुश रहना है।
मनुष्य होने का सार यही है, कि वह दोषहीन होने की इच्छा न रखे।
हर घटना का एक परिणाम होता है जो उसी घटना में छुपा हुआ होता है।