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तमामतर कृतियों में

tamamatar kritiyon mein

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट

अन्य

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बेर्टोल्ट ब्रेष्ट

तमामतर कृतियों में

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    तमामतर कृतियों में श्रेष्ठ

    वही हैं मेरे तईं जो बरती जा चुकीं

    दचकों-भरा ताँबे का लोटा, जिसकी किनारे हुई भोथरी,

    काँटे-छुरी जिनकी लकड़ी की मूठें

    चिकनी हो चुकीं कई हाथों से : ऐसे आकार

    मुझे लगे सबसे उदात्त। इसी तरह पुराने घरों के आसपास पैबस्त ईंटें

    कई-कई पैरों से रुँदीं, घिसी-दबीं

    जिनके बीच-बीच में घास के गुच्छे उगे, ये

    हैं भाग्यशाली कृतियाँ

    बरती जा चुकीं कई लोगों के द्वारा

    बदलतीं बार-बार, निखारती रहतीं वे अपना रंग रूप और

    —बारहा चखी जाकर।

    यहाँ तक कि मूर्ति के टुकड़े भी

    होती जाती अनमोल

    फेंक दिए गए जिनके हाथ, मुझे प्रिय हैं। वे भी

    जीवित हो उठते मेरे लिए। कट चुके, फिर भी कभी वे भी साथ थे।

    कुचले गए, फिर भी वे कभी बहुत नहीं उठे।

    अधढही इमारतें

    यों दिखने लगती हैं ज्यों हों अभी अधबनी

    विशद रूपरेखा के साथ : उनके मनोहर आयाम

    पूर्वकल्पित हैं, पर उन्हें अभी भी

    चाहिए हमारी सूझ-बूझ बावजूद इसके कि

    वे कर चुकीं पूरी सेवा, बल्कि वे हो चुकीं विजित। यह सब

    उत्फुल्ल कर देता है मुझको।

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्यास से मरती एक नदी (पृष्ठ 118)
    • संपादक : वंशी माहेश्वरी
    • रचनाकार : कवि के साथ अनुवादक रायनर लोत्स, गिरधर राठी
    • प्रकाशन : संभावना प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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