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ब्रजी लोकगीत : हाँ हाँ स्याम रंग बरसैगो

brji lokgit ha han han syam rang barasaigo

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रोचक तथ्य

संदर्भ—विवाह के अवसर पर।

हाँ हाँ स्याम रंग बरसैगो, हाँ हाँ राम रंग बरसैगो।

सब सारे बरसाने वारे, रावल वारे सारे। स्याम०।

बाबा जी भानोखर वारे, प्रेम सरोवर वारे। स्याम०॥

बाग बगीचा सबही सारे, सारे सींचन हारे। स्याम०॥

ठाढ़े ठाढ़े सबही सारे, सारे बैठनहारे। स्याम०॥

कोई मनसुखा जुगत लगाई, सखी काजरवारी। स्याम०॥

इन गारिन को बुरा मानो, कृष्णचन्द्र के प्यारे। स्याम०॥

स्रोत :
  • पुस्तक : हिंदी के लोकगीत (पृष्ठ 283)
  • संपादक : महेशप्रताप नारायण अवस्थी
  • प्रकाशन : सत्यवती प्रज्ञालोक
  • संस्करण : 2002

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