प्राचीन पंडित और कवि महावीर प्रसाद द्विवेदी का लिखा एक लेख है. इस लेख में पाँच कवियों के समूह का नाम 'एस्कृत कविपंचक' रखा गया है. इस लेख के मुताबिक, भवभूति के समय के बारे में बहुत कम जानकारी मिलती है. हालांकि, भवभूति के नाटकों और प्रबंधों में उस समय के लोगों की स्थिति का कुछ पता चलता है. इस आधार पर, भवभूति को कालिदास का समकालीन मानने की बजाय, उस समय के आस-पास का मानना ज़्यादा उचित है।
हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली
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