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क्रांति आम जनता और व्यक्ति से शक्ति के संचय तथा संधान की माँग करती है।
त्रुटियाँ तो केवल उसी से नहीं होंगी जो कभी कोई काम करे ही नहीं।
नारियों को हर जगह युवकों के साथ योजनाबद्ध काम करना चाहिए। इससे उन्हें उच्चता प्राप्त होती है और वे वैयक्तिक मातृत्व की दुनिया से सामाजिक मातृत्व की दुनिया में पहुँच जाती है।