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राहुल सांकृत्यायन

1893 - 1963 | आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश

हिंदी यात्रा साहित्य के जनक के रूप में समादृत लेखक, इतिहासकार, बौद्ध विद्वान और बहुभाषाविद्। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

हिंदी यात्रा साहित्य के जनक के रूप में समादृत लेखक, इतिहासकार, बौद्ध विद्वान और बहुभाषाविद्। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

राहुल सांकृत्यायन की संपूर्ण रचनाएँ

यात्रा वृत्तांत 5

 

आलोचनात्मक लेखन 1

 

उद्धरण 49

आदमी के कृतित्व का मूल, उसकी उठाई लहरों की शक्तिशालिता है।

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घुमक्कड़-धर्म ब्राह्मण-धर्म जैसा संकुचित धर्म नहीं है, जिसमें स्त्रियों के लिए स्थान नहीं हो। स्त्रियाँ इसमें उतना ही अधिकार रखती हैं, जितना पुरुष।

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घुमक्कड़ी-धर्म छुड़ाने के लिए ही पुरुष ने बहुत से बंधन नारी के रास्ते में लगाए हैं। बुद्ध ने सिर्फ़ पुरुषों के लिए घुमक्कड़ी करने का आदेश नहीं दिया, बल्कि स्त्रियों के लिए भी उनका वही उपदेश था।

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कवि, लेखक और कलाकार यदि ज्ञान में टुटपुँजिए हों, तो उनकी कृतियों में गंभीरता नहीं सकती।

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स्नेह जहाँ पुरुष-पुरुष का है; वहाँ वह उसी निराकार सीमा में सीमित रह सकता है, लेकिन पुरुष और स्त्री का स्नेह कभी प्लेटोनिक प्रेम तक सीमित नहीं रह सकता।

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रेखाचित्र 1

 

पुस्तकें 39

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