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मस्तिष्क में आया हुआ विचार मनुष्य के चरित्र का आरंभ है।
प्रत्येक नवीन दिन एक नवीन जीवन का आरंभ है जिसमें मनुष्य नए विचार और कार्य नूतन विवेक और उत्साह से कर सकता है।
मनुष्य का समस्त चरित्र उसके विचारों से बनता है।
पुराने आघातों का स्मरण करना मानसिक अंधकार है और आघातकर्ताओं से बदला लेने का विचार करना मानसिक आत्मघात है।