Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

हिमांशु जोशी

1935 - 2018 | चम्पावत, उत्तराखंड

हिमांशु जोशी के उद्धरण

साँस रुकती है, उसे मौत कहते हैं। गति रुकती है, तब भी मौत है। हवा रुकती है, वह भी मौत है। रुकान सदा मौत है। जीवन नाम चलने का है।

कलाकार भटकता रहे, उद्भ्रांत रहे, किसी प्रयोजन में नियोजित कर दिया जाए तो वह बड़ी शक्ति बन जाता है। नहीं तो वह अपने को ही खाता है।

Recitation

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए