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विश्व कविता पर कविताएँ

देखता आ रहा हूँ

निकोलाई रेरिख

सुबह

निकोलाई रेरिख

इस महानगर में

मारीना त्स्वेतायेवा

आलोक

निकोलाई रेरिख

भिखारी

निकोलाई रेरिख

मिट्टी के नीचे

निकोलाई रेरिख

अनंत

निकोलाई रेरिख

देख सकेंगे

निकोलाई रेरिख

कल देखोगे

निकोलाई रेरिख

विश्वास करूँ?

निकोलाई रेरिख

समुद्र

लेओनार्दो सानउऐसा

क्यों नहीं मार सकते?

निकोलाई रेरिख

हमारे लिए?

निकोलाई रेरिख

नहीं कर सकते

निकोलाई रेरिख

पतझर

निकोलाय ज़बोलोत्स्की

भीड़ में

निकोलाई रेरिख

प्रेम

निकोलाई रेरिख

समय

निकोलाई रेरिख

एक दिन

निकोलाई रेरिख

नृत्य में

निकोलाई रेरिख

व्यर्थ

निकोलाई रेरिख

तुम्हें समझे बिना

निकोलाई रेरिख

हमारा रास्ता

निकोलाई रेरिख

पवित्र चिन्ह

निकोलाई रेरिख

दुहराने लगो

निकोलाई रेरिख

गिनती न करना

निकोलाई रेरिख

पगडंडियाँ

निकोलाई रेरिख

और प्रेम

निकोलाई रेरिख

दूर ले जाने वाला

निकोलाई रेरिख

शिखर पर

निकोलाई रेरिख

ईश्वर भला करेगा

निकोलाई रेरिख

हमारा समय

निकोलाई रेरिख

तुम्हारी मुस्कुराहट

निकोलाई रेरिख

दूर नहीं गए

निकोलाई रेरिख

चाबियों की रखवाली

निकोलाई रेरिख

जहाँ भेजा गया था

निकोलाई रेरिख

सब के सामने

निकोलाई रेरिख

सजाए रखो

निकोलाई रेरिख

वह कल

निकोलाई रेरिख

बिल्लियाँ

मारीना त्स्वेतायेवा

गह्वर

निकोलाई रेरिख

हीरा

निकोलाई रेरिख

सुरक्षित रखूँगा

निकोलाई रेरिख

पत्थर

ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त

बढ़ती हैं चिंताएँ...

अलेक्सांद्र ब्लोक

एक अप्रत्याशित भेंट

वीस्वावा षिम्बोर्स्का

चिड़िया

ओक्ताविओ पाज़

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere