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प्रतीक्षा पर ग़ज़लें

प्रतीक्षा या इंतिज़ार

किसी व्यक्ति अथवा घटित के आसरे में रहने की स्थिति है, जहाँ कई बार एक बेचैनी भी अंतर्निहित होती है। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतीक्षा के भाव-प्रसंगों का उपयोग करती कविताओं से एक अलग चयन।

चुप्पी मारि बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

सुनसान पांतरमे

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

दिल के सुलझी

जौहर शफियाबादी

साध सावन के

जौहर शफियाबादी

का रखल बा अब

कृष्णानन्द कृष्ण

याद में तहरा

अशोक द्विवेदी

पथरा गइल नयन—दीआ बुता चुकल रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

खटकल मनवाँ दरेर हो

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

खोलि हृदयक द्वार बैसल छी

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere