vah aavaz har raat lautati hai
तवायफ़ मुश्तरीबाई के प्यार में पड़े असग़र हुसैन से उनके दो बेटियाँ हुई—अनवरी और अख़्तरी, जिन्हें प्यार से ज़ोहरा और बिब्बी कहकर बुलाया जाता। बेटियाँ होने के तुरंत बाद ही, असग़र हुसैन ने अपनी दूसरी बीवी, मुश्तरीबाई को छोड़ दिया। उस मुश्किल घड़ी में मुश्तरीबाई को अपनी दोनों बेटियों के साथ ख़ूब संघर्ष करना पड़ा। वे मासूम-जान, जब चार बरस की हुई तो कहीं से ज़हरीली मिठाई खा ली। उनकी तबीयत ख़राब होने लगी। दोनों को अस्पताल ले गए, जहाँ ज़ोहरा ने दम तोड़ दिया। लेकिन बिब्बी जैसे-तैसे बच गई।