लेखकों की समस्याएँ : व्यष्टि और समष्टि
व्यष्टि और समष्टि—व्यक्ति और समाज—कहानी लेखन के संदर्भ में एक को हटाकर मैं दूसरे की कल्पना नहीं कर सकता। आदमी जिस क्षण आँख खोलता है, देखने-सुनने लगता है, बाहर होने वाले कार्य-व्यापार को वह अपने मन के आईने पर प्रतिबिंबित करके देखता है। देखने वाला, सुनने
उपेंद्रनाथ अश्क
भारतीय कथा−साहित्य का विकास
भारतीय उपन्यासों का आधुनिक रूप हम लोगों को पश्चिम से ही मिला है। परंतु यह नहीं कहा जा सकता कि भारतीय कथा−साहित्य के विकास में एकमात्र पाश्चात्य साहित्य का ही प्रभाव पड़ा है। भारतीय कथा−साहित्य के विकास में एकमात्र पाश्चात्य साहित्य का ही प्रभाव पड़ा
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere