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वसंत पर गीत

वसंत को ऋतुराज कहा गया

है, जब प्रकृति शृंगार करती है। प्रकृति-काव्य का यह प्रमुख निमित्त रहा है। नई कविताओं ने भी वसंत की टेक से अपनी बातें कही हैं। इस चयन में वसंत विषयक कविताओं को शामिल किया गया है।

सखि वसंत आया

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

गंध मदन के

भोलानाथ गहमरी

आउ, हम वसन्तकेँ बजाबी

मार्कण्डेय प्रवासी

बसन्त रितु रंग भरे

अशोक द्विवेदी

सुभ सुभ सुभ नया साल हो

रामजियावान दास ‘बावला’

बोलि उठे कोइलरिया

भोलानाथ गहमरी

सखि फागुन आइल

रामजियावान दास ‘बावला’

वसंत की प्रतीक्षा

जयशंकर प्रसाद

वसंत

जयशंकर प्रसाद

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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