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अनुरोध पर ग़ज़लें

घटी का, बढ़ल

गहबर गोवर्द्धन

दिल के सुलझी

जौहर शफियाबादी

तू याद-झरोखे आ जा

सूर्यदेव पाठक ‘पराग’

तोहरा दरसन के याचना

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere