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जनता पर कविताएँ

जनता

विवेक भारद्वाज

जनता

सेसर वायेखो

बल्गारियाई

इवान रादोयेव

बोतेव

निकोला वाप्त्सारोव

जनता के नाम पत्र

मारीआ मोंतेरो

जनता की रोटी

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट

लोकतंत्र के महापर्व

कृष्णानन्द कृष्ण

लोकतंत्र बा लूटीं भाई

कृष्णानन्द कृष्ण

गणतंत्र-1

रोशन जनकपुरी

कबले सहब

कृष्णानन्द कृष्ण

मधुमाछीक खोंता आ हम

रामानुग्रह झा

हारि गये परधानी

जगजीवन मिश्र ‘जीवन’

जनता चुप बा

कृष्णानन्द कृष्ण

इश्तहार

महाप्रकाश

प्रजावर्गकेँ पड़ल प्रयोजन

चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

जन-जागरण

आरसी प्रसाद सिंह

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere