जहाँ सीधे प्रमाण नहीं मिलते, वहाँ दर्शन हावी हो जाता है।
जब तक यह विश्वास होता है कि एक चीज़ सत्य है, तुम उसको साबित करने की ज़रूरत नहीं समझते। अगर तुम ऐसा करते हो; तो उन लोगों को संतुष्ट करने के लिए करते हो, जो तुम्हारी आस्था में विश्वास नहीं रखते।
जिसने ईश्वर को पहचान लिया, उसके लिए तो दुनिया में कोई अछूत नहीं है। उसके मन में ऊँच-नीच का भेद नहीं है।
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आज हम जिसे अस्पृश्यता मानते हैं उसके लिए शास्त्र में कोई प्रमाण नहीं है।
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere