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जगह पर कविताएँ

चौक

होर्खे लुइस बोर्खेस

ग्रीष्मावकाश

कोलिन फ़ाल्क

न्यू इंग्लैंड : 1967

होर्खे लुइस बोर्खेस

शालीनता में खोया

येहूदा आमिखाई

लाइम रेगिस स्टेशन

कोलिन फ़ाल्क

एक बार लौटा फिर

येहूदा आमिखाई

हम जहाँ सही होते हैं

येहूदा आमिखाई

उतनी ही जगह में

सी. पी. कवाफ़ी

कमरे के बारे में

शुन्तारो तानीकावा

पहिया बदलना

बेर्टोल्ट ब्रेष्ट

भोर से पहले विदा

नाकानो शिगेहारु

पहाड़ की तलहटी

कामिमुरा हाजिमे

छायाओं की दुनिया

हंस माग्नुस एन्त्सेंसबर्गर

पूछताछ के बाद

गियोर्गी ज्यागारोव

तुलुआ का मैदान

फेरनांदो चार्री लारा

आदमी, स्त्रियाँ और नगर

फ्रानो अल्फ़ोरेविच

उतनी ही जगह में

सी. पी. कवाफ़ी

अनूठा चौक

इरैना वृकल्यान

दूर जगह

मिशियो माडो

सहरसा छी हम

मुख्तार आलम

ठाहर

हरेकृष्ण झा

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere