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ustad rashid khan: 'punh: sawera ek aur fera hai ji ka'

ustad rashid khan: 'punh: sawera ek aur fera hai ji ka'

कुमार मंगलम
'kori cheel mhari kaya par chhaya karain'

'kori cheel mhari kaya par chhaya karain'

अनिरुद्ध उमट
reshma hamari kaum ko gaati hai kisi ek mulk ko nahi

reshma hamari kaum ko gaati hai kisi ek mulk ko nahi

Rajendra Detha
vah aavaz har raat lautati hai

vah aavaz har raat lautati hai

तवायफ़ मुश्तरीबाई के प्यार में पड़े असग़र हुसैन से उनके दो बेटियाँ हुई—अनवरी और अख़्तरी, जिन्हें प्यार से ज़ोहरा और बिब्बी कहकर बुलाया जाता। बेटियाँ होने के तुरंत बाद ही, असग़र हुसैन ने अपनी दूसरी बीवी, मुश्तरीबाई को छोड़ दिया। उस मुश्किल घड़ी में मुश्तरीबाई को अपनी दोनों बेटियों के साथ ख़ूब संघर्ष करना पड़ा। वे मासूम-जान, जब चार बरस की हुई तो कहीं से ज़हरीली मिठाई खा ली। उनकी तबीयत ख़राब होने लगी। दोनों को अस्पताल ले गए, जहाँ ज़ोहरा ने दम तोड़ दिया। लेकिन बिब्बी जैसे-तैसे बच गई।

Shubham Ameta

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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