यात्रा पर कहानियाँ
यात्राएँ जीवन के अनुभवों
के विस्तार के साथ मानव के बौद्धिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। स्वयं जीवन को भी एक यात्रा कहा गया है। प्राचीन समय से ही कवि और मनीषी यात्राओं को महत्त्व देते रहे हैं। ऐतरेय ब्राह्मण में ध्वनित ‘चरैवेति चरैवेति’ या पंचतंत्र में अभिव्यक्त ‘पर्यटन् पृथिवीं सर्वां, गुणान्वेषणतत्परः’ (जो गुणों की खोज में अग्रसर हैं, वे संपूर्ण पृथ्वी का भ्रमण करते हैं) इसी की पुष्टि है। यहाँ प्रस्तुत है—यात्रा के विविध आयामों को साकार करती कविताओं का एक व्यापक और विशेष चयन।
क्या तुमने कभी कोई सरदार भिखारी देखा?
एक तारीख़ की शाम अजमेर से रवाना होकर हम दो की सुबह साढ़े पाँच बजे दिल्ली पहुँचे। हमें निजामुद्दीन से पौने सात बजे दूसरी गाड़ी पकड़नी थी और कुलियों ने बताया कि आज रिक्शा-टैक्सी कुछ नहीं चल रहे हैं, इसलिए हम छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से नई दिल्ली तक आए। वहाँ
स्वयं प्रकाश
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere