Font by Mehr Nastaliq Web

उम्मीद पर ग़ज़लें

साध-सपना हिया

ए. कुमार ‘आँसू’

अइस बनै माहौल

अशोक अज्ञानी

भोर आके कतो

जगन्नाथ

जिनगी के डेग

मिथिलेश ‘गहमरी’

खल्लर मल्लर करै

अशोक अज्ञानी

पाँव कतनो जरी

गहबर गोवर्द्धन

इंसान सुधरि जाय

अशोक अज्ञानी

दिल के सुलझी

जौहर शफियाबादी

कहाँ अन्हरिया के

मिथिलेश ‘गहमरी’

नाव डूबत है

अशोक अज्ञानी

एकटा तलाश जारी छै

राम चैतन्य धीरज

आग रहे हवा

मिथिलेश ‘गहमरी’

भुला देल तू जे

तैयब हुसैन पीड़ित

कड़ी भुलाइल गीतन के अब

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

नेह गंगा बहावे चलीं जा

ब्रजभूषण मिश्र

क्या हैं हम

नवल बिश्नोई

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए