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उम्मीद पर ग़ज़लें

साध-सपना हिया

ए. कुमार ‘आँसू’

भोर आके कतो

जगन्नाथ

जिनगी के डेग

मिथिलेश ‘गहमरी’

आम महफिल में बनिके खास रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

अइस बनै माहौल

अशोक अज्ञानी

खल्लर मल्लर करै

अशोक अज्ञानी

पाँव कतनो जरी

गहबर गोवर्द्धन

इंसान सुधरि जाय

अशोक अज्ञानी

दिल के सुलझी

जौहर शफियाबादी

कहाँ अन्हरिया के

मिथिलेश ‘गहमरी’

नाव डूबत है

अशोक अज्ञानी

बोलऽ जनि बस निहारऽ, हशारा मिली

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

एकटा तलाश जारी छै

राम चैतन्य धीरज

आग रहे हवा

मिथिलेश ‘गहमरी’

भुला देल तू जे

तैयब हुसैन पीड़ित

पथरा गइल नयन—दीआ बुता चुकल रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

नेह गंगा बहावे चलीं जा

ब्रजभूषण मिश्र

कड़ी भुलाइल गीतन के अब

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

क्या हैं हम

नवल बिश्नोई

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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