Font by Mehr Nastaliq Web

ग्लानि पर कविताएँ

आत्मग्लानि

रवि यादव

बजबजाती अस्थियाँ

आऊलिक्की ओकसानेन

पछतावा

होर्खे लुइस बोर्खेस

गुनाह

फरूग़ फरूख़ज़ाद

ग्लानि

डी. एच. लॉरेंस

आमुख

चेस्लाव मीलोष

अपराधबोध

यानिस रित्सोस

भूख

जयंत महापात्र

उसके हाथ

जयंत महापात्र

हमयँ अब देखात हय

रफ़ीक़ शादानी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए