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बेटी पर गीत

हिंदी कविता में बेटियों

का आगमन उनकी आशाओं-आकांक्षाओं और नम्र आक्रोश के साथ हुआ है, तो पिता बनकर उतरे कवियों ने उनसे संवाद की कोशिश भी की है। प्रस्तुत चयन में इस दुतरफ़ा संवाद को अवसर देती कविताओं का संकलन किया गया है।

मेरा बेटा पूछ रहा है

ज्ञान प्रकाश आकुल

उदासी

विनम्र सेन सिंह

गिरवी खेत

विनम्र सेन सिंह

जनम लेली बेटी

मूंगालाल शास्त्री

बिटिया

अशोक अज्ञानी

कन्यादान

कालीकान्त झा ‘बूच’

बेटी बनलि पहाड़

कालीकान्त झा ‘बूच’

मिथिलाक बेटी

कालीकान्त झा ‘बूच’

एलें तूँ जखने

अमित पाठक

बेटीक लेल एक गीत

शान्ति सुमन

दुलरुई धिया अलसाय

अशोक द्विवेदी

बेटियाँ

विभूति तिवारी

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

हिन्दवी उत्सव 2026

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