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विश्वनाथ त्रिपाठी

1931 | सिद्धार्थनगर, उत्तर प्रदेश

प्रगतिशील धारा से संबद्ध प्रमुख आलोचक और कवि। संस्मरण विधा में भी योगदान।

प्रगतिशील धारा से संबद्ध प्रमुख आलोचक और कवि। संस्मरण विधा में भी योगदान।

विश्वनाथ त्रिपाठी के बेला

23 दिसम्बर 2025

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

‘नहीं होने’ में क्या देखते हैं

विनोद कुमार शुक्ल की एक कविता है—‘आदिम रंग’। पहली पंक्ति प्रश्नवाचक है—आदिम रंग आदिम मनुष्य ने क्या देखा था? (प्रश्नवाचक चिह्न कवि की पंक्ति में नहीं है) फिर वह अनुमान या कल्पना करते हैं—सूर्यादय या

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