संपूर्ण
कविता5
गीत4
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एकांकी2
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लोककथा19
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सृजनात्मक लेखन8
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अज्ञात के व्यंग्य
ठहाके
हाथी — इस पृथ्वी पर मुझसे बलवान कोई जीव नहीं है। चींटी — अच्छा! अगर इतने ही बलवान हो तो मेरे बिल में घुसकर दिखाओ। लड़की (सहपाठी से) — वह कौन-सी कली है जो खिल नहीं सकती? सहपाठी — आसान सी बात, छिपकली और क्या! अमन हाथ से दाने फेंकने का अभिनय कर रहा।
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere