Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Udayraj Jati

کی

स्वारथ प्यारो कवि उदै, कहै बड़े सो साँच।

जल लेवा के कारणे, नमत कूप कूँ चाँच॥

  • विषय : 1
    اور 1 مزید

अति करौ कहि कवि उदै, अति कर रावन कंस।

आप गयौ जानत सकल, गयौ संपूरन बंस॥

  • विषय : 1

आछा खावै सुख सुवै, आछा पहिरे सोइ।

अति आछो रहणी रहै, मरै बूढ़ा होइ॥

  • विषय : 1

उदै राज खेलौ हँसौ, मनिखा देही सार।

इह सगपण जिवतन मिलण, बहुरि दूजी बार॥

  • विषय : 1

सज्जन मिलण समान कछु, उदै दूजी बात।

सेत पीत चूनौ हरद, मिलत लाल ह्वै जात॥

  • विषय : 1

उदै सीख कहि क्यों दिए, सीख दिया दुख होइ।

अपनी करनी चालणी, बुरी देखै कोइ॥

  • विषय : 1

सूर सुख्ख अरु दुख्ख को, दोउ गिणो विचार।

जेतौ जुग भइँ चाँदणों, ते तौ पख अंधार॥

  • विषय : 1

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए