त्रिलोचन का आलोचनात्मक लेखन
निराला की एक कविता : हिन्दी के सुमनों के प्रति पत्र
इस शीर्षक में 'पत्र' शब्द कविता का अर्थ खोल देता है। हिन्दी में 'सुमनों के प्रति' पत्र की ओर से बात कही गई है। 'पत्र' शब्द पाँच छंदों की इस कविता में तीसरे छंद की तीसरी पंक्ति में आया है। 'पत्र' के हिन्दी में कई अर्थ हैं; चिट्ठी और पत्ता। इस कविता में
जनभाषा और काव्यभाषा
कविता में हर पीढ़ी के कवियों ने भाषा पर विचार किया है और यह विचार आज भी होता रहता है। सवाल है कि ऐसी क्या स्थिति आ जाती है जिसके कारण भाषा के तौर-तेवर देखने और पहचानने की कोशिश चलती रहती है। भाषा पर अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि विस्तार इतना
काव्य और अर्थ-बोध
अपने विषय पर कुछ कहने के पूर्व, इसी विषय से संबंध रखनेवाले दो-एक प्रसंगों का अवतरण करने के लिए मैं पाठकों से क्षमा चाहता हूँ। एक प्रतिष्ठित पत्र के संपादक ने, जिनके साथ मैं काम किया करता था, एक दिन अपने हाथ के लेख को मेज पर डालकर, चश्मे की कमानी को
निराला की नई कविता
निराला जी की नई कविता से अभिप्राय उनकी उन कविताओं से है जो '39 के बाद की हैं। ये कविताएँ उनके चार संग्रहों में उपलब्ध हैं—अणिमा, कुकुरमुत्ता, बेला और नए पत्ते। इन्हीं चारों पुस्तकों के आधार पर यह लेख लिखा जा रहा है। निराला जी की नई कविताएँ उनकी पुरानी
रीतिकाल : एक क्षयी युग
सत्रहवीं शती के मध्य से उन्नीसवीं शती के मध्य का काल (सन् 1650-1850) रीतिकाल माना जाता है। यों रीतिकाल का पहला कवि मैं केशव को मानता हूँ। यद्यपि उनके पश्चात् लगभग आधी शती तक रीतिकाल का समुचित रूप नहीं दिखाई पड़ता, परंतु केशव में वे समस्त प्रवृत्तियाँ
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere