Font by Mehr Nastaliq Web
Surykant Tripathi 'Nirala''s Photo'

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

1896 - 1961 | मिदनापुर, पश्चिम बंगाल

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार। महाप्राण नाम से विख्यात।

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार। महाप्राण नाम से विख्यात।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की संपूर्ण रचनाएँ

कविता 30

गीत 25

ग़ज़ल 1

 

पत्र 1

 

आलोचनात्मक लेखन 2

 

निबंध 5

 

उद्धरण 14

दुःख को देवता समझो।

  • शेयर

जितने भी धर्म प्रचारित किए गए, सब अपनी व्यापकता तथा सहृदयता के बल पर फैले।

  • शेयर

बिना इंद्रियों को जीते धर्माचरण निष्फल है।

  • शेयर

नेता? नेता कौन है? मनुष्य? एक मनुष्य सब विषयों की पूर्णता पा सकता है? 'न। इसीलिए नेता मनुष्य नहीं। सभी विषयों की संकलित ज्ञान-राशि का नाम नेता है।

  • शेयर

पेट जितना भी भरा रहे, आशा कभी नहीं भरती। वह जीवों को कोई-न-कोई अप्राप्य, कुछ नहीं तो केवल रंगों की माया का इंद्रधनुष प्राप्त करने के मायावी दलदल में फँसा ही देती है।

  • शेयर

पुस्तकें 11

वीडियो 18

This video is playing from YouTube

Recitation