सर जॉन डेनहम के उद्धरण
महत्त्वाकांक्षा प्रेम की तरह होती है—विलंबों और प्रतिद्वंद्वियों दोनों के प्रति अधीर।
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
1615 - 1669 | डबलिन
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here
रजिस्टर कीजिए