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Siddheshwar Singh

1963 | غازی پور, اتر پردیش

تمام تمام

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जिस किताब में अच्छी कविता होती है, उसके पास दीमकें नहीं फटकतीं।

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फूलों को तोड़कर गुलदान में सजाने वाले शायद ही कभी किसी बीज का अंकुरण देख पाते होंगे।

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आटे को जितनी बार छाना जाए थोड़ा-बहुत चोकर तो निकल ही आता है।

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भरोसा बनाए रखो कि तुम्हें भाषा पर सचमुच भरोसा है और हाँ, इसकी कोई समय-सीमा नहीं।

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आँच केवल आग में ही नहीं पाई जाती। कभी एकांत मिले तो अपने लिखे हुए के तापमान को जाँचो।

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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