शिवमूर्ति की कहानियाँ
सिरी उपमा जोग
किर्र-किर्र-किर्र घंटी बजती है। एक आदमी पर्दा उठाकर कमरे से बाहर निकलता है। अर्दली बाहर प्रतीक्षारत लोगों में से एक आदमी को इशारा करता है। वह आदमी जल्दी-जल्दी अंदर जाता है। सवेरे आठ बजे से यही क्रम जारी है। अभी दस बजे ए.डी.एम. साहब को दौरे पर भी
ख़्वाजा, ओ मेरे पीर!
माधोपुर से शिवगढ़ तक सड़क पास हो गई। तो सरकार ने आख़िर मान ही लिया कि ऊसर जंगल का यह इलाक़ा भी हिंदुस्तान का ही हिस्सा है। पिछले पचास वरस में कितनी दरख़ास्तें दी गईं। दरख़ास्त देने वाले नौजवान बूढ़े हो चले तब जाकर... चलो सुध तो आई, वरना छ:-सात कि.मी.
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere