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शंकर शैलेंद्र

1923 - 1966 | रावलपिंडी, पंजाब

‘तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर...’ के रचयिता और लोकप्रिय गीतकार। सिनेमा और प्रगतिशील आंदोलन से संबद्ध।

‘तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत में यक़ीन कर...’ के रचयिता और लोकप्रिय गीतकार। सिनेमा और प्रगतिशील आंदोलन से संबद्ध।

शंकर शैलेंद्र की संपूर्ण रचनाएँ

कविता 13

उद्धरण 9

अत्यधिक दुःखी लोग गलती से काव्य-क्षेत्र में जाते हैं। जो वे गीतों में सिखाते हैं, उसे वे दुःखों में सीखते हैं।

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कल्पना की तुलना में बुद्धि इसी प्रकार है जैसे कर्ता की तुलना में उपकरण, आत्मा की तुलना में शरीर और वस्तु की तुलना में उसकी छाया।

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कवि का भोजन है प्रेम और यश।

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यदि शीत ऋतु गयी है, तो क्या वसंत ऋतु अधिक दूर हो सकती है?

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हम भूत और भविष्य को देखते हैं और जो नहीं है उसकी कामना करते हैं। हमारा निष्कपट हास्य भी किसी वेदना से युक्त होता है।

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पुस्तकें 1

 

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