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Sant Laldas

1540 - 1648 | راجستھان

تمام تمام

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थोड़ा जीवण कारनै, मत कोई करो अनीत।

वोला जौ गल जावोगे, जो बालु की भीत॥

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नेकी जबलग कीजिये, जबलग पार वसाय।

नेकी तणा विसायता, जै सिर जाय तो जाय॥

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चकवा चकवी दो जणा, इन मत मारो कोय।

ये मारे करतार नै, रैन विछोहा होय॥

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मैमंता मन मारीये, नहना कर कर पीस।

तौ सुष पावै सुंदरी, पदम झलैकै सीस॥

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क्या घर का क्या वाहला, डोरी लागी राम।

आपनी आपनी जौम मै, बुडी जाय जीहान॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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