Font by Mehr Nastaliq Web
noImage

Sant Laldas

1540 - 1648 | راجستھان

کی

थोड़ा जीवण कारनै, मत कोई करो अनीत।

वोला जौ गल जावोगे, जो बालु की भीत॥

नेकी जबलग कीजिये, जबलग पार वसाय।

नेकी तणा विसायता, जै सिर जाय तो जाय॥

  • विषय : 1

चकवा चकवी दो जणा, इन मत मारो कोय।

ये मारे करतार नै, रैन विछोहा होय॥

  • विषय : 1

मैमंता मन मारीये, नहना कर कर पीस।

तौ सुष पावै सुंदरी, पदम झलैकै सीस॥

दीपक जोरा तेल भर, वाती करी सुधार।

पूरा किया वीसाहना, वहोर आवै बाट॥

मन गया तो जान दे, पग मत देवो जानि।

कतवारी के सुत जौ, फेर मीलोगे आनि॥

क्या घर का क्या वाहला, डोरी लागी राम।

आपनी आपनी जौम मै, बुडी जाय जीहान॥

Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

रजिस्टर कीजिए