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Sant Keshavdas

تمام تمام

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भजन भलो भगवान को, और भजन सब धंध।

तन सरवर मन हँस है, केसो पूरन चँद॥

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सतगुरु मिल्यो तो का भयो, घट नहिं प्रेम प्रतीत।

अंतर कोर भींजई, ज्यों पत्थल जल भीत॥

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आस लगें बासा मिलै, जैसी जा की आस।

इक आसा जग बास है, इक आसा हरि पास॥

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जगजीवन घट-घट बसै, करम करावन सोय।

बिन सतगुरु केसो कहै, केहि बिधि दरसन होय॥

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जेहि घर केसो नहिं भजन, जीवन प्रान अधार।

सो घर जम का गेह है, अंत भये ते छार॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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