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Praveenray

کی

विनती राय प्रवीन की, सुनिए साहि सुजान।

जूठी पातरि भखत हैं, बारी वायस, स्वान॥

ऊँचे ह्वै सुर बस किये, सम ह्वै नर बस कीन।

अब पताल बस करन को, ढरकि पयानो कीन॥

  • विषय : 1

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हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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