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Nipat Niranjan

1623 - 1698 | مدھیہ پردیش

تمام تمام

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मुह देखे का प्यार है, देखा सब संसार।

पैसे दमरी पर मरे, स्वार्थी सब व्यवहार॥

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ना देवल में देव है, ना मसज़िद खुदाय।

बांग देत सुनता नहीं, ना घंटी के बजाय॥

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मन की ममता ना गई, नीच छोड़े चाल।

रुका सुखा जो मिले, ले झोली में डाल॥

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जब हम होते तू नहीं, अब तू है हम नाहीं।

जल की लहर जल में रहे जल केवल नाहीं॥

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जहाँ पवन की गती नहीं, रवि शशी उदय होय।

जो फल ब्रह्मा नहीं रच्यो, निपट मांगत सोय॥

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Recitation

हिन्दवी उत्सव, 27 जुलाई 2025, सीरी फ़ोर्ट ऑडिटोरियम, नई दिल्ली

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